बूढ़ा महादेव स्वयंभू है, रजवाड़ा की समय वहां पर बॉस, छापरिन व झाड़ी के बीच में शिवजी तथा नाग-नागिन थे।

एक किसान का गाय रोज वहां ज्यादा तथा उसके थन से दूध की धार निकलती, वह शिवजी के ऊपर गिरती और नाग नागिन दूध पीते थे, यह गाय का रोज का नियम था।

एक दिन किसान ने गाय के पीछे जाकर देखा तथा पूरा हाल राजा को का सुनाया, तब राजा ने पंडितों से पूजा पाठ कर जगह को साफ करवाया और छोटा सा मंदिर शिव जी के लिए बनवाया वहीं पर मंदिर के बाहर में नाग-नागिन का मूर्ति बनवाकर स्थापित किया।

उस मंदिर के फूटने पर दूसरा मंदिर बनाया गया है पर वह में कभी असंख्य बिच्छू दिखते हैं कभी सी जी को मांगते लपेटे दर्शन देते हैं।

नया तालाब में शिव मंदिर-

बैजनाथ मालवीय द्वारा नया तालाब खुदाया गया तथा उसके पार में शिव मंदिर का निर्माण कराया गया, उसमें जमीन भी चढ़ा था, मरम्मत सन 1848 में किया गया।
पार में हनुमान जी का छोटा सा मंदिर रामचंद ध्रुव जी ने बनवाया है।



 
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