कथा (1):- एक ब्राम्हण की संतान नहीं थी, फिर वह रतनपुर महामाई के पास गया, मां सपने में बताई कि तुम्हारे ग्राम नवागढ़ में महालक्ष्मी जी की मूर्ति सुरती तालाब के पास जमीन के अंदर में है,उसे निकाल कर उन से संतान की याचना करना ।
फिर पंडितजी नवागढ़ आए और पंडितों से सलाह ले कर जहां कुआं है,उसी को खोदकर मूर्ति निकाले, फिर पूजा पाठ कर विधिवत स्थापना करके संतान मंगे, उनकी एक पुत्री हुई।
कथा (2):- एक थानेदार थे किसी केस में फंस गए तो महां लक्ष्मी जी के पास जाकर अर्जी विनती किये कि केस जीतने पर आपका छाया बनवाऊंगा,फिर केस जितने पर लक्ष्मी जी का मंदिर बनवाया ।
पहले पुजारी मोहन तिवारी के पिता पं. बच्चा पंडित पूजा करते थे, बाद में दादूलाल जी को पूजा करने दिया।
मूर्ति की जगह जहां गड्ढा था, उसका सन 2002 में मरम्मत किया गया।हुम् धुप देकर जल निकालकर पहले खेतों में रोग ना आवे कह कर डालते थे ।
ज्योति कक्ष 2007 में बना।
बरम बाबा:- उसी जगह जहाँ पीपल का पेड़ है, उसमें बरम बाबा रहते हैं। पुजारी सुमन प्रसाद उपाध्याय।
साई बाबा मंदिर:- साई बाबा मंदिर का निर्माण प्रारम्भ सन 2011 में