मंदिर का निर्माण 1858 सन में हुआ है, खूबीराम वल्द भंगी दीवान के द्वारा मंदिर निर्माण कराया गया है, खूबीराम दिवान द्वारा 230 एकड़ जमीन, 20 तोला सोना और 500 तोला चांदी चढ़ाया गया है, ये गुप्ता परिवार के है।

महंत - पहले महंत काशीदास, दूसरा प्रयाग दास तीसरा बंसी दास चौथा बलभद्र दास, पांचवा बृजभूषण दास छठवा मधु दास।

पुजारी अनुरागी दास जी - जो बचपन से मंदिर में पूजा करते थे,उनका उम्र 90 वर्ष का हो चुका था,फिर उनका स्वर्गवास हो गया।

दानदाता- मंदिर में गोकुला प्रसाद चौबे 50 एकड़ जमीन थे, खेदिया गौटनीन 11 एकड़ जमीन दान किये थे।

कृष्ण मंदिर बना राम मंदिर- राम मंदिर पहले कृष्ण मंदिर के नाम से बना था। राम जी की मूर्ति बिकने गाड़ी भैंसा से नवागढ़ लाया गया था, सौदा नहीं पटने पर कहीं दूसरी जगह जा रहे थे, तो 2-3  गाड़़ा टूटने पर मूर्ति को नवागढ़ में गुप्ता परिवार लेकर मंदिर में पधराये थे। बाद में बगल के कृष्ण मंदिर का निर्माण बंसी दास महंत जी द्वारा सन 1911 में कराया गया, जिसकी लागत उस समय 25 हजार रुपए आयी थी।

राम मंदिर के जमीन- राम मंदिर का कई गांव में जमीन था- नवागढ़ , समेसर, छेरकापुर ,छितपार, मानपुर में ज़मीन था, बहुत जमीन सीलिंग में निकलने से बटवारा हो गया तथा भूमिहीनों को दे दिया गया और कुछ जमीनों को बेचा गया।

गर्भगृह- राम मंदिर के गर्भगृह में पश्चिम दिशा में राधा- कृष्ण जी की मूर्ति स्थापित है, राम जी के सामने पूर्व में गरुड़जी,पश्चिम में हनुमान जी की मूर्ति है।

कृष्ण मंदिर- कृष्ण मंदिर के परिसर में नरसिंह, परशुराम, गरुड़ जी ,हनुमान जी, वाराह एवं जय विजय की मूर्ति रखी गई है। कृष्ण मंदिर की चौखट में मिस्त्री शिवलाल का नाम अंकित है।

चरण पादुका- मंदिर की परिक्रमा करने पर पूर्व भाग पर चार आचार्य- रामानंदाचार्य, निम्बकचार्य, माधवाचार्य, वल्लभाचार्य की चरण पादुका रखी है।

कृष्ण मंदिर के आग्नेय कोण में ऊपरी भाग में है माँ दुर्गा की मूर्ति है, पूर्व में शिव पार्वती, श्याम कार्तिक गणेश जी शेष नाँग है। बाहर चबूतरा में नंदी स्थापित है। प्रवेश द्वार के पास हनुमान जी का चबूतरा है जो रामजी के सम्मुख है।

मंदिर में संतों के बैठने के लिए मकान है,धुनी की जगह अलग है, दक्षिण में मवेशी-कोठा व बाड़ी में कुआं है।

 
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