श्री गणेश जी को वंदना कर लेखनी आगे बढ़ा ग्राम के सभी देवी देवताओं को प्रणाम करता हूँ।

नवागढ़ का प्राचीननाम- नवागढ़ को पहले नरवरगढ़ कहते थे, इसे गढ़ काली के नाम से भी पूर्व में कहा जाता था।


छ.ग. के संभाग- 
प्राचीन समय में छत्तीसगढ़ में दो संभाग थे, जिसमे प्रथम रायपुर संभाग और दुसरा रतनपुर संभाग था, जिससे दोनों संभागों के अंतर्गत 18-18 गढ़ थे, जिसमे रतनपुर के अंतर्गत नवागढ़ भी शामिल था, जहाँ गोंडवाना राजा राज किया करते थे। जिसमें राजा नरवर साय का नाम अति प्रचलित है।

किले का निर्माण- नवागढ़ के किले का निर्माण सन 580 ई. में शुरू किया गया था। किले का निर्माण सुरक्षा की दृष्टि से किया गया था, जहां पर किले का निर्माण किया गया वह एक टीला था, जिसके चारो तरफ खाई था, जिसमें हमेशा पानी एवं दलदल होता था, किला के अंदर ही एक कोने में घोड़े तथा हाथियों को दफनाने के लिए व्यवस्था किया गया था।

किला बनने के बाद महामाई, भैरव बाबा, ठाकुर देव, गणेश जी, हनुमान जी की प्राण प्रतिष्ठा कराये। सन 686 में भादो शुक्ल चतुर्थी को श्री गणेश जी की प्रतिष्ठा हुई।

मानाबंद तालाब की कथा- रानी के नाम पर मानाबंद खुदवाया गया था, रानी का नाम मानाबाई था। महामाई एवं मानाबंद तालाब का निर्माण तांत्रिक विधि से किया गया है। गांव की सुरक्षा की दृष्टि से मानाबंद बहुत महत्व का था, तांत्रिक विधि से इसका निर्माण इस तरह कराया गया था कि लुटेरे या दुश्मन नवागढ़ आते तो ग्रामवासी अपने बचाव के लिए मानाबंद में अपने कीमती सामान लेकर घुस जाते थे, तो जो पानी ग्रामवासियो के लिए कमर तक होता था, उसी पानी में दुश्मन घुसते तो डूब जाया करते थे, ऐसा सयाने लोग बताया करते थे।

तालाबो के विषय में- नवागढ़ में 126 तालाब 1 बावली एवं कुआँ ग्राम निस्तार के लिए पर्याप्त थे,आज की स्तिथि में मात्र 20 तालाब ही जीवित है बाकी को खेती में उपयोग कर रहे है,यहाँ तालाबो को बंद के नाम रखते थे जैसे - मानाबंद, भगनाबंद,जुडबन बंद,दाऊबंद,चांदाबंद आदि।

जीवित तालाबो में कमल का फूल था, जो चैत्र एवं क्वार के नवरात्रि पर्व पर यहाँ के फूल देवता में चढ़ाने दुरस्थ शहरो में जाता था, जैसे रायपुर दुर्ग बिलासपुर अनेको जगह जाता था, पत्ता से ग्राम निस्तार होता था जैसे शादी मृतक कार्य में आसपास के लोग पत्ता निशुल्क ले जाते थे।

राजा बगीचा एवं गुरु बगीचा- यहाँ राजवाड़े के समय राजा बगीचा व गुरु बगीचा था, राजा के समय में राजा बगीचा पूर्व दिशा में व गुरु बगीचा दक्षिण दिशा में था। बगीचे में विविध प्रकार के पेड़, फूल लगे रहे होंगे, आज दोनों बगीचे उजाड़ होकर कृषि के काम में आ रहे है।

नाला- यहाँ नगर के बीच दो नाला है, जिसका नाम मुहारंगिया नाला व छुईहा नाला है, जो निस्तार के लिए सुगम है।

राजवाड़े का  अन्त- नवागढ़ के अधीनस्थ 384 ग्राम था, ये 9 किले यहाँ के अधीनस्थ थे। 11वीं 12 वीं सदी के बीच में, खुसरो गोत्र के नरपति शाह नाम के राजा थे, अंतिम राजा वीर सिंह का पुत्र नरवर शाह था, जिसे मराठो ने कैद कर 17वीं सदी में उरई के जेल में डाल दिया था, जो 10 साल बाद मृत पाया गया।
 
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