बहती गंगा में हाथ धोने दो,
माँ की गोदी में मुझे भी शहीद होने दो,
कोई तो कह दे सेना और सरकार से,
मैं ऊब गया हूँ माया के संसार से,
भारत माँ की माला में अपना शीश पिरोने दो,
माँ की गोदी में एक बार मुझे भी शहीद होने दो।
कबसे बैठा हूँ अपनी बारी का इन्तजार करते,
सीमा में जरा हम भी शत्रु पर वार करते,
विवशता की जंजीरों में जकड़ा हुआ हूँ रोज,
कब तक ढोऊं अकर्मण्यता का बोझ,
सीमा की मिट्टी में अपना पाप धोने दो,
बस एक बार, सिर्फ एक बार
माँ की गोदी में मुझे भी शहीद होने दो।।
 
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