मिस्त्री बताते थे कि महामाया मंदिर के जीर्णोद्धार के समय जब नीव की खुदाई हुई, तो नेह में हाथा जो दिए थे, उसमे 1 पंजे की लंबाई अभी के दो पंजे के बराबर थी।
मानाबंद तालाब के पास में महामाई का मंदिर है, जो गोड राजा के द्वारा बनाया गया है, मंदिर एवं तालाब तांत्रिक विधि से बनाया गया है, देवी और राजा आमने सामने बात करते थे, माँ गांव की रक्षा सुरक्षा हमेशा करती है।
महामाई के मंदिर से लगा हुआ उत्तर दिशा में भैया लाल जी द्वारा छोटा सा मंदिर देवी का बनवाया गया है।
देवी मंदिर- इसके उत्तर में लगा हुआ सोनकर समाज का सार्वजनिक मंदिर देवि का बनवाया है, उसके उत्तर में लगा हुआ साहू समाज का सती चबूतरा एक छोटे मंदिर के रूप में बनवाया है।
गायत्री मंदिर- मंदिर के पुर्व भाग में अमोला बाई बे. लेड़गा राम साहू सुकुल पारा वाले ने गायत्री देवी की मूर्ति स्थापना की है। जिसमे 50 डिसमिल जमीं चढ़ाया गया है।
शीलता देवी- राजा के जमाने का पुराना मूर्ति खंडित होने पर, ओंकार प्रसाद पिता कमल सिंह द्वारा प्राण प्रतिष्ठा कराया गया है। ग्रामवासी गांव में किसी को चेचक का प्रकोप होने पर शीतला माँ में जल चढ़ाते हैं, तथा नारियल फोड़कर होम धूप देते हैं, जिससे प्रकोप शांत होता है।
बिहारी बाबा- गायत्री देवी एवं शीतला देवी के बीच में बिहारी बाबा की समाधि है। समाधी से लगा हुआ हनुमान जी की पंचमुखी मूर्ति राम जानकी लखन गणेश जी और साई बाबा की मूर्ति ओंकार ताम्रकार द्वारा मंदिर निर्माण कर मूर्ति का स्थापना कराया गया है।
महामाई के दक्षिण दिशा में तालाब पार यक्षणी चबूतरा में साहू समाज सार्वजनिक शंकर मंदिर बनवाए है।
काली माँ का चबूतरा- मानाबंद के उत्तर पार में सार्वजनिक कुटी बनाया गया, दशहरा के समय वहां पर महिषासुर वध का अभिनय करते है।
बाबा महेन्द्रनाथ- मानाबंद के पूर्व पार में बाबा महेंद्र नाथ का चबूतरा बनाया गया है।