हमर छत्तीसगढ़ महतारी
हाय रे 2 महान हावे राम, मोर छत्तीसगढ महतारी ह महान हावै रे ।।टेक।।
उत्तर दक्षिण पूरब पश्चिम, चारो कोती पहाडी रे संगी ।
चारो दिशा के बीच नइये, जंगल अऊ झाडी ।।1।।
बड़े मयारू मोर छत्तीसगढ़,सबो प्रान्त के वासी रे संगी ।
छोटे बडे सब धंधा कर के ,बनगे छस्तीसगढ़ के वासी ।।2।।
बड़े 2 हे बाग बगीचा , देखब में मन भरथे रे संगी ।
हरियर हरियर पहाड़ परबत, गजब सुन्दर लगथे ।।3।।
लोहा पथरा कोइला के ,भरपूर हे भंडार रे संगी ।
हीरा सोना बहुत किसम के,ओंहू हवै अपार ।। 4 ।।
बडे बड़े हे टार बांध, जहाँ भरे लबालब पानी है संगी ।
इहे सब फसल होत हे, धान कटोरा जानी ।। 5 ।।
इहै बिराजे देवी देवता, साधु अऊ सन्यासी रे संगी ।
मोर भुइया के पावन माटी लगथे मथुरा कांशी ।। 6 ।।
सबो कोती मोटर दऊड़त, रेल घलो ह चलथे रे संगी ।
छत्तीसगढ़ के पावन धरती म, हवाई जहाज ह उडथे ।।7।।
इहे बसत हे चारो बरन, हिन्दू मुस्लिम सिख इसाई रे संगी।
सबो झनहा एक संग बइठत, प्रेम सहित सब भाई ।।8।।
मोर छरुतीसगढ़ बड़े मयारू, सब संग माय जताथे रे संगी ।
हली भली सब ला पूछते, हसत हसत गोठियाथे ।।9।।
छत्तीसगढिया बड़े दयालु, दया मया म आगू रे संगी ।
छस्तीसगढ़ म पूछत आईन, अंधा म होगे आगू ।।10।।
चारो मुड़ा ले आके संगी, हमर भिलाईम बसगे रे संगी ।
भुखहा दुखिया मन के इहा चिन्हारी होथे,
एक दो रुपया किलो में सस्ता चाऊर मिलथे ।।11।।

धन्य धन्य छत्तीसगढ़ माई
धन्य - धन्य छस्तीसगढ़ माय तोरे गुण ल गावौ आज कि जै गंगा ।।टेक।।
ऋषि मुनि के आश्रम आ्य, महादेव निवास बनाय जै गंगा ।।1।।
महानदी अऊ अरपा पैरी, हाफ शिवनाथ के धार बोहाय जै गंगा ।। 2 ।।
धनहा में तो धान बोआय, भर्री में ओन्हरी आय जै गंगा ।।3।।
किसम 2 के अनाज होवे, भरपूर फायदा किसान ल होवे जै गंगा ।। 4।।
गांव-गांव में सड़क बनगे,घर-घर  में तो बिजली लगगै जै गंगा ।।5।।
गांव-गांव में स्कूल खुलगे,लड़का-लड़कीं पढ़इहा होगे जै गंगा ।। 6 ।।
छत्तीसगढ तो बढियाआय, भारत में तो नाम कमाय जै गंगा ।। 7 ।।
बड़े बड़े हे पहाड़ पर्वत, बडे- बडे नदिया के धार जै गंगा ।। 8 ।।
 
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