हिन्दी के बीच-बीच म अंगरेजी,
जइसे मनखे के मुड़ी म,
कुकुर के भेजी,
आगे तोपचंद कस भारी,
गलती कर के
कहत हे-आई एम साॅरी,
हमरो तो हवय,
सुग्घर माइ हिन्दी,
माटी के मर्यादा सुहागिन के बिन्दी,
हीरो-होन्डा के दिन आगे,
नन्दागे सायकल,
राम अउ सीता के,
नाव हवय-मोना अउ मायकल,
मंत्री के इंटरव्यू आत हे,
त हमन देखत हन,
टार दई! काहे के गोठियाथे,
हिन्दी म बोलही कहिथंन त
अंग्रेजी म सोटियाथे,
वाह रे भारत के सियान हो,
फिरंगी मन तो भारत म आके,
अंग्रेजी बोलत हें,
अउ बिदेष जाके तुंहर नीयत,
हिन्दी बर डोलत हे,
अरे! सुन लव गा मोर देश के भारती,
हिन्दी के चरन पखारव,
छोड़व अंग्रेजी के आरती,
अंग्रेजी के चिखला ल,
झन खुंदव भारत के पंडित,
संत मन के बनाय मर्यादा ल,
झन करव खंडित,झन करव खंडित।।

 
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