अनुशासन A+ A- Print Email आज गुलामी नहीं है फिर भी,जाने ना कोई मोल,हर प्राणी उच्छृंखल हो रहे,बोल रहे बड़बोल,अंग्रेजों का हंटर था जब,अनुशासन था मस्त,अब स्वतंत्रता का रूप हो गया,भारतवर्ष में ध्वस्त।